Saturday, 19 August 2017

11-------“मेरे बापू क्या -2 कहूं--------- ?”


कब तक आँख मैं कचरा गिरने का बहाना करता रहूंगा 
'ये लो आज शरेआम कहता हूँ मैं तुम्हे याद करके रोता हूँ ।।

Love you daddy
सचमुच, बहुत अच्छी बात है ----”
कुर्सी पर बैठे -2 पुरानी यादों में खो गये ----“मेरे बापू क्या -2 कहूं--------- ?”

पिता हैं मेरे सूरज जैसे
अन्धेरा उनसे हटता है,
जीवन में आगे बढ़ने का ,
हर मौका उन से मिलता है IaI

अंगुली पकड के चलता था,
कभी उनका माथा ठनका,
पिता के सपनों की दुनिया में ,
शोभित होता उनका माथा IbI

उम्मीदों की दुनिया में ,
आशा की किरण टिकी थी मुझ पे ,
हंसते -2 कष्ट सहे,
आंखे उनकी टिकी थीं मुझ पे IcI

यही सोच बस मेरा
अंधेरा छ्ट्ता हैं,
जीवन में आगे बढ़ने का ,
हर मौका उन से मिलता है IdI

याद है मुझको वे भी पल
जो चाहा वो मिला प्यार से ,
शोर मचाता चीजें तोड़ता ,
मिली डांट भी बड़े प्यार से IeI

स्वयं ही सारे दुःख झेले ,
बुरी नजर से बचा के रक्खा
इक पल आंख से ओझल होना ,
घबराहट ने दबा के रक्खा I fI

जब भी याद कंरू वे पल,
जी मेराभर जाता है 
जीवन में आगे बढ़ने का ,
हर मौका उन से मिलता IgI

बापू जो भी सपने तेरे ? ,
मुकाम हासिल करना है मुझको ,
बिन बोले में मैं समझ लिया ,
अब उनको पूरा करना मुझको IhI

बाह्य हस्तक्षेप आनें देगें ,
दखलन्दाजी सहन से दूर ,
अम्मू-बापू, के सपने
नहीं रहेगें हमसे दूर IiI

परिवार साथ चलता है जब ,
सम्मान, समाज में मिलता है
सभी बढ़े सहयोग करें,
सब कुछ जीवन में मिलता है IjI

पिता हैं मेरे सूरज जैसे
अन्धेरा उनसे हटता है,
जीवन में आगे बढ़ने का ,
हर मौका उन से मिलता है II IkI


प्यार वो करें हमें !
आर्शीवाद चाहिए अम्मा बापू का
अम्बेकेश्वर किरनजी;
वोटिंग तो नहीं करानी ?
(अर्चना राज)

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