Friday, 19 June 2020

-हिन्दी ------मेरी कवितायें: 38-अपना बनता सारा जहां (Hindi Poem/AZ//03/2003)

-हिन्दी ------मेरी कवितायें: 38-अपना बनता सारा जहां (Hindi Poem/AZ//03/2003): अपना बनता सारा जहां (Hindi Poem/AZ//03/2003) दिल में जिसके समाये राम वो प्रेम से जपता सीताराम दुख-दर्दों सेमिले निजात ये लाख ट...

-हिन्दी ------मेरी कवितायें: षणयन्त्र -----5-

-हिन्दी ------मेरी कवितायें: षणयन्त्र -----5-: षणयन्त्र -----5-------अभी हाल में लाखों मजदूर एकाएक बाहर आ गये अफवाहों का शिकार हुए ,सैकडो किमी पैदल चलना पड़ा, इस तरह की साजिश थी कि बृ...

षणयन्त्र -----5-


षणयन्त्र -----5-------अभी हाल में लाखों मजदूर एकाएक बाहर आ गये अफवाहों का शिकार हुए ,सैकडो किमी पैदल चलना पड़ा, इस तरह की साजिश थी कि बृहदर स्तर पर कोरोना फैले और सैकडो लोगों को इस बीमारी का शिकार बनाया जाय, यह साजिशन थाI यथार्थवादी कविता के माध्यम से बेहतर प्रदर्शित किया जा सकता, आखिर हुआ क्या और देशद्रोहियों का मकसद क्या ?शुरुआती बेहतरीन पकड़ को धराशायी कर दियाI
(Hindi Poem/2058/20)
भुला न पाएंगे
याद करेंगे
और रोएंगे
बार-बार
यही कहेंगे
काली करतूत थी तेरी
समझ गये हम हेराफेरी
न कोई प्लानिंग न कोई सोच
छोड़ी जनता
समझ के बोझ
काम कागजी
ड्रामाबाजी
गद्दारों ने कसर न छोड़ी
राहें दुश्मन की पकड़ी------1
रोजी-रोटी छीन लिया था
खाने को कुछ नहीं दिया था
बातें लंबी चौड़ी
दिया न फूटी कौडी
रातों रात की बाजी
चल दिया था काजी
काम कागजी
ड्रामाबाजी
गद्दारों ने कसर न छोड़ी
राहें दुश्मन की पकड़ी------2
ये बला कहां से आई
देख के जनता पछताई
भूखे प्यासे चलते भाई
शरम जरा भी ना आई
लाक डाउन किये थे मोदी
हर पहलू को समझे मोदी
ये याद रहेंगी ताजी
अरे !दुश्मन की ड्रामा बाजी
काम कागजी
गद्दारों ने कसर न छोड़ी
राहें दुश्मन की पकड़ी------3
नमन है उन वीरो का
ध्यान रखा मजदूरों का
किसी ने बढके रोटी दी थी
किसी ने जमके सेवा की थी
डा० पुलिस प्रशासन साफ सफाई भाई
सेवा करते हरदम है
इस कोविडसे लड़ते दिन रात
भूलते अपने सारे गम हैं
सेवा तेरी याद करेगा
अपना देश हमेशा जी
अरे !दुश्मन की ड्रामा बाजी
काम कागजी
गद्दारों ने कसर न छोड़ी
राहें दुश्मन की पकड़ी------4
Raj.

Tuesday, 9 June 2020

38-अपना बनता सारा जहां (Hindi Poem/AZ//03/2003)

अपना बनता सारा जहां
(Hindi Poem/AZ//03/2003)
दिल में जिसके समाये राम
वो प्रेम से जपता सीताराम
दुख-दर्दों सेमिले निजात
ये लाख टके की सुन लो बात
अरे !भटके राही जाते कहां ?
राम-नाम की लूट यहां-----1
प्यार जहां का हमको मिलता
प्रेम से जीवन सबका कटता
भेद-भाव न कर पाते
सबको चलते, अपना बनाते
प्रेम बरसता ,देखो! यहां
अरे !भटके राही जाते कहां ?
रामनाम की लूट यहां-----2
जरा पास तो आओ ना
दर्शन करके देखो, यहां
आंसू कभी ना गिरते हैं
काम भी बनते अपने हां
इसको बना लो
उसको सुना दो
अपना बनता सारा जहां
अरे भटके राही जाते कहां
रामनाम की लूट यहां-----3
Jai shri Ram..Let happiness come to all ! Best wishes from pious land of Shri Ram Ayodhya.Raj.

Saturday, 19 August 2017

37-----(हार कभी ना तुम मानो

    Poems
(C A/38/1975)
हार कभी ना तुम मानो


(हार कभी ना तुम मानो
 दूर कभी ना तुम भागो
देर भला कब होती है
समय पर प्यारे तुम जागो
दुख दर्दों की रोज कहानी
अपनी जानी तेरी मानी
 बचपन बीता बीती जवानी
 कभी ख़त्म होती कहानी
जो होना है होने दो
आलस को बस तुम त्यागो
दूर कभी ना तुम भागो
देर भला कब होती है
समय पर प्यारे तुम जागो

तेरी ताकत तू क्या जाने
 दुनिया भी  तो न पहचाने
रोज वो तुमसे कहती है
 ताने तुमको देती है
जीवन है संघर्ष यहां
कभी दूर ना तुम भागो
देर भला कब होती है
समय पर प्यारे तुम जागो
 समय पर प्यारे तुम जागो
 अर्चना व राज

36----खूब निभेगी तेरी मेरी---


035----पता नहीं कब होंगे कम