Saturday, 19 August 2017

37-----(हार कभी ना तुम मानो

    Poems
(C A/38/1975)
हार कभी ना तुम मानो


(हार कभी ना तुम मानो
 दूर कभी ना तुम भागो
देर भला कब होती है
समय पर प्यारे तुम जागो
दुख दर्दों की रोज कहानी
अपनी जानी तेरी मानी
 बचपन बीता बीती जवानी
 कभी ख़त्म होती कहानी
जो होना है होने दो
आलस को बस तुम त्यागो
दूर कभी ना तुम भागो
देर भला कब होती है
समय पर प्यारे तुम जागो

तेरी ताकत तू क्या जाने
 दुनिया भी  तो न पहचाने
रोज वो तुमसे कहती है
 ताने तुमको देती है
जीवन है संघर्ष यहां
कभी दूर ना तुम भागो
देर भला कब होती है
समय पर प्यारे तुम जागो
 समय पर प्यारे तुम जागो
 अर्चना व राज

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