Saturday, 19 August 2017

17-----राजपूत रणबांकुरा-----

राजपूत रणबांकुरा
(Z/21/1385)
साथ रहे जिसके तलवार
प्यार करें जिसको तलवार
दूर में रहती है जिसके हार
वही है मेरा यार
राजपूत रणबांकुरा------
प्यार वह दिल से संबको करता
प्रेम मिले प्रेम बढ़ाता
धोखा नहीं है इसे मंजूर
मरने से भी ना डरता
रण क्षेत्र में उसको लगता है
जैसे मनाता वह त्यौहार
वही है मेरा यार
राजपूत रणबांकुरा-----
अस्सी घाव बदन पर जिसके
हार को जिसने न माना
योद्धा हुआ ना इस धरा पर अब तक
दुनिया ने लोहा माना
देख उसे दुश्मन घबराता
माने अपनी हार
वही है मेरा यार
राजपूत रणबांकुरा-----
शांत हुआ रणबांकुरा
मची है हाहाकार
चोर लफंगे नजर में आते
करते पीछे से वार
काम धाम सब पिछड़ गया
झूठा चढ़ा खुमार
वही है मेरा यार
राजपूत रणबांकुरा-----
मिलकर कदम बढ़ाए सब
सोये को हमें जगाना
खोया गौरव खोई ताकत
हमको फिर से हैं लाना
मिलकर साथ चलें सब
यही वक़्त की है पुकार
वही है मेरा यार
राजपूत रणबांकुरा-----
(अर्चना राज)



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