Raj/A/2
मुझ जैसा अनजान शख्स
नहीं ज्ञान ध्यान को जाना
निपट निरक्षर ज्ञान से दूर
लेकिन मित्रों को पहचाना
जाने समझे प्रेम की भाषा
कृतज्ञता को हम प्रगट करते
तेरा स्थान नहीं मिलता
समझ ये जीवन ना पाते
सदा रहे नजदीक आपके
अहम वहम ना पाला हमने
प्रतिदिन सन्ध्या के आते
रहते मिलते दर्शन आपके
जो भी गलती की हो हमने
मिटा के; खिला दो अपने चेहरे
नव वर्ष के शुभ अवसर पे
नई आशाओं के साथ है तेरे
शांति समृद्धि धन दौलत
हर दिन आ लाए खुशियां फूल
घर में बरसे देश में महके
मिटा दो दिल के सारे शूल
सुख ,प्रेम, दोस्ती ,सहयोग की खातिर
हम तो कहेंगे इतना मात्र
कोई कुछ भी क्या बोले
केवल आप है धन्यवाद के पात्र
( अर्चना राज़)

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