Saturday, 19 August 2017

01-----साथ तेरा है छूट गया

Raj/A/6(P)
साथ चले थे ले के तुमको
साथ तेरा है छूट गया
हमने घरौंदा मिल के बनाया
 टुकड़े हो के टूट गया
किस्मत मेरी आंग का दरिया
बरसातों की है नदियां
सैलाब जीवन में ऐसा आया
टूट गया अपना भी जरिया
सबको लेके चला गया
साथ चले थे लेके तुमको
साथ तेरा है छूट गया
हमने घरौंदा मिल के बनाया
 टुकड़े हो के टूट गया---1
यह सपना है या हकीकत
दीप प्यार का बुझा गया
गम के आंसू दे गया
चुप के से वो चला गया
 यह करना है  वो करना है
 सबको अब तो जाने दो
 लड़ती झगड़ती राह रोकती
अब ना मुझको कहने दो
ऐसा उसने क्यों किया
क्यों दिल को मेरे जला गया
 हंसती मेरी अपनी खुशियां
 मिट्टी में मुझे मिला गया
सुना हादसा समझ सकी ना
दो लव्ज़ भी मुंह से निकले ना
अभी तो मेरे साथ में वो था
 शब्द तेरे कुछ कहते ना
काश !तू कहता झूठ निकलता
दिल को मेरे चीर गया
दुख में अकेला छोड़ गया
झूठ बोलता तू है!
झूठ बोलती दुनिया सारी
जलन सभी के दिल में है
मेरे प्यार से दुनिया है हारी
वो दिल में मेरे समा गया
क्यों मुझे अकेला छोड़ गया
मैंने अपनी दी कुर्बानी
अपना जीवन भुला दिया
 मुझको वो क्यों रुला गया
ना साथ में अपने ले गया
किसके हवाले छोड़ गया 
गम के आंसू दे के  गया
( अर्चनाराज़)


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