शादी
का है इंतजार
Y/24/1337
सज धज
के दुल्हन में बैठी है
शादी
का है इंतजार
der हो
गई बारात ना आई
क्यों
हो गई तकरार
दहेज
ना मांगा
दुल्हन
पसंद थी पहली
घर आए
दुल्हन जल्दी
जल्दी
आए उसकी डोली
प्यारse
दोनों घर पर मिलते
डेट करी
थी मुकर्रर ----
लड़ने
का कोई ना आधार
बारात
na फिर क्यों आई
दिल भी
बैठा बड़ी उदासी
खुशी
बनी तनहाई
किसने
कर दी गलती
किसका
रहा कसूर----
सपने
सारे चकनाचूर
मेहनत
गई बेकार
आज खुशी
का दिन था सबका
क्यों
हो गई तकरार-----
आज दुखी
मन दुल्हन का है
बन कर
बैठी नई नवेली
मन तो
उसके क्या बीती है
दुखड़े
कितने वो झेली
आज का
दिन है धोखे वाला
कहां
गई जीवन की बहार-----
(अर्चना व राज)
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