Saturday, 19 August 2017

32-----शादी का है इंतजार

शादी का है इंतजार
Y/24/1337

सज धज के दुल्हन में बैठी है
शादी का है इंतजार
der हो गई बारात ना आई
क्यों हो गई तकरार
दहेज ना  मांगा
दुल्हन पसंद थी पहली
घर आए दुल्हन जल्दी
जल्दी आए उसकी डोली
प्यारse दोनों घर पर मिलते
डेट करी थी मुकर्रर ----
लड़ने का कोई ना आधार
बारात na फिर क्यों आई
दिल भी बैठा बड़ी उदासी
खुशी बनी तनहाई
किसने कर दी गलती
किसका रहा कसूर----
सपने सारे चकनाचूर
मेहनत गई बेकार
आज खुशी का दिन था सबका
क्यों हो गई तकरार-----
आज दुखी मन दुल्हन का है
बन कर बैठी नई नवेली
मन तो उसके क्या बीती है
दुखड़े कितने वो झेली
आज का दिन है धोखे वाला
कहां गई जीवन की बहार-----

(अर्चना राज)


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